ENVIRONMENT AND ECOLOGY

जीव मंडल के सभी संगठकों के समूह जो पारस्परिक क्रिया में सम्मिलित होते हैं को पारिस्थितिकी तंत्र कहते हैं पारिस्थितिकी तंत्र का प्रयोग सर्वप्रथम एजी ट्रांसले ने 1935 में किया था
पारिस्थितिकी वातावरण और जीव समुदाय के संबंधों का अध्ययन है इसे सर्वप्रथम अर्नेस्ट हैकल ने व्यक्त किया था इसके अंतर्गत पौधे एवं जंतुओं के निवास स्थानों या उन पर वातावरण के कारण पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन किया जाता है इससे जीव एवं उनके संपूर्ण जैविक अजैविक संगठनों के अध्ययन का बोध होता है इसके साथ ही इसके जीव एवं वातावरण के अन्य संगठकों के अंतर्संबंधों की प्रक्रिया का भी पता चलता है पारिस्थितिकी के अध्ययन के विषय क्षेत्र में हमेशा से विकास होता रहा है

पारिस्थितिकी तंत्र में जैविक, अजैविक संगठन, पोषण स्तर, ऊर्जा प्रवाह, भू- रासायनिक चक्र, प्रकाश संश्लेषण, आहार उत्पादकता, जीव जगत ,पादप जगत, पर्यावरण अवनयन, प्राकृतिक आपदाएं, प्रदूषण असंतुलन तथा पर्यावरण प्रबंधन आदि विषयों का अध्ययन किया जाता है आधुनिक मानव की क्रियाओं का प्रभाव पर्यावरण पर तीव्र गति से पढ़ रहा है इसका प्रभाव प्राकृतिक पर्यावरण के साथ-साथ मनुष्य पर भी पड़ता है इसी कारण पारिस्थितिकी संबंधी संकल्पना पर चिंतन प्रारंभ हो गया है

पारिस्थितिकी तंत्र पृथ्वी के निश्चित क्षेत्र में फैला एक आधारभूत इकाई है जो हमेशा क्रियाशील रहती है इसके अंतर्गत जैविक एवं अजैविक संगठनों की किसी निश्चित समय के अंतर्गत उनके आपसी अंतर क्रियाओं एवं अंतर्संबंधों को शामिल किया जाता है वस्तुतः इसे एक इकाई के रूप में समझा जा सकता है इसके अंतर्गत लघु स्तरीय से वृहद् स्तरीय जीवन तथा उनके भौतिक पर्यावरण के मध्य पारस्परिक अंतर्क्रिया होती रहती है

 

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